सरकारी स्कुल का मास्टर और गणतन्त्र दिवस
~फ़ेक न्यूज़~
साँचोर: रोज दस बजे स्कुल जाने वाला वो ही माड़सा आज अपनी धर्मपत्नी से सुबह पाँच बजे ये कहते हुये सुना गया की “ए संजये गी माँ! फटाफट पाणी ऊनो कर,आज छेब्बीस जेनभरी है,स्कुल जानो है” कान से थोड़ी बहरी श्रीमतीजी ने तपाक से पूछा “किंगी जानछड़ी है?” मास्टर ग़ुस्से में बोला “अरे जान तो मेरी छड़ी ही न्याल हुयो वहु तो,आज झंडो है झंडो” माड़सा ने नहाधोकर आठ गुना बने अमल की एक काकरी मुँह में दबाते हुये बोला की “जे मोक्को मिल्यो अर लाडु ऊबरया तो लीआव हूँ हो”
शोरूम से लेकर आज तक रिज़र्व मोड पेट्रोल में रहने वाली बजाज प्लेटिना 100CC बाइक को किक मारते हुये गुरुजी चल दिये गणतन्त्र दिवस उत्सव मनाने।स्कुल की छत पर लगे माइक में बज रहे गाने “ज़रा आँख में भरलो पानी” को सुनकर माड़सा की आँखो में हक़ीक़त में पाणी बह रहा था क्यूँकि आज अफ़ीम उगा नही पाये थे,ख़ैर ये सोचकर अपने लक्ष्य की और बढ़ रहे थे की कोई तो स्कुल में मनवार करेगा ही।
उधर गाँव वाले अपने अपने बच्चों के हाथ पकड़े स्कुल में ऐसे दाख़िल हो रहे थे जैसे 69सालों से ग़ुलामी सह रहे इन काले अंग्रेजो के सिस्टम से आज मुक्त होकर ही घर जायेंगे।इधर सरकारी स्कुल के मास्टर अपने अपने काम में मगन थे कोई लड्डू बाँटने के लिये भामाशाह को पटा रहा था तो कोई बच्चों को भाषण कैसे देना है वो सीखा रहा था,सुदूर मैदान में खड़ा शारीरिक शिक्षक मैदान में शुरू होने वाले पोलो खेल में घोड़ों की नाल पकड़े उस घुड़सवार की तरह लग रहा था जो किसी तरह ये चाहता था की पीटी परेड ठीक ढंग से हो जाये।हेड मास्टर साहब अपने भाषण में अंत समय में एसी कीले ठोक रहे थे ताकि गाँव वाले प्रभावित हो और किसी आला अधिकारी को शिकायत ना करे।
लड्डू कितने मंगवाने है इसलिये बच्चों की गिनती कर रहा गणित का जबलपुर से B.ed किया मास्टर बार बार गिनती भूले जा रहा था क्यूँकि आज स्कुल में ना पढ़ने वाले बच्चे भी लड्डू के लालच में आ गये थे।
गाँव के बस स्टेशन और चौहटे वाली किराने की दुकान पर रोज़ MLA/MP लेवल की राजनीति पर किचला/बहस/तर्क वितर्क करने वाले माड़ साहब आज माइक संचालन कर रहे थे और ज़ोर ज़ोर से बीच बीच में भारत माता की जय भी बोल रहे थे,जोश में एक बार तो भूल से भारत माता के साथ प्रगतिशील शिक्षक संघठन की भी जय बोल गये।ख़ैर आख़िरकार 69वाँ गणतंत्र दिवस जनगणमन गीत से शुरू हुआ और सबने अपनी अपनी औक़ातानुसार व पहुँच के हिसाब से कुर्सियाँ हथिया ली जैसे कांग्रेस राज में रॉबर्ट वाड्रा ने किसानो की ज़मीन। साँसकर्तिक कार्यक्रम चल ही रहा था की तभी रेत पर बेठे बच्चों में से एक आवाज़ आइ की “माड़सा ओ दिनियो मेर लार ऊ हवा भरे है” दिनिये नाम का बच्चा पूरी स्कुल में उद्दंड और बदमाश था और उसको पता था की आज उसको कोई कुछ नही कहेगा क्यूँकि पूरे गाँव वाले आये हुये है, रोज गुरुजी के चाय बनाने के लिये “इंधन” “कूचरा” ना लाने पर बेंतो से पिटाई करने वाले शारीरिक शिक्षक भी आज बड़े प्यार से बोले की “दिनेश बेटा बदमाशी नहीप”।
उधर वो सुबह जल्दी जगे गुरुजी के अफ़ीम ना उगने पर नाक में से पानी,छींके और आँखो में से घड़ीयाल की तरह आँसु बाहर आ रहे थे,किसी तरह उन्होंने आज के लाभार्थी भामाशाह के हार्डकोर बँधानी ताऊ के पास आकर पूछा की “ख़ियाणीया गो तो नाव कर लियो भाई अण थारे हड़मान,पैसा तो कई लोग कमाते है मगर दान और पुण्य करना हर किसी के वश की बात नही”
“खियानी सल्तनत/ठिकाने/वंश का नाम सुनते ही उस भामाशाह के ताऊ ने फ़टाक से अपनी जेब से सो ग्राम अफ़ीम वाली पोटली निकाली बाहर और गुरुजी को कर दिया घंटाघर की घड़ी की तरह।
एक तरफ़ गणतंत्र उत्सव चल रहा था तो दूसरी तरफ़ अद्र्श्य भारत माता अपनी छाती के ऊपर बेठे नन्हें नेनिहालों को देखकर अपनी आँखो में से टप टप आँसु टपका रही थी ये सोचकर की क्या होगा इनके भविष्य का,बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कैसे आगे बढ़ पायेंगे सरकारी स्कुल के मेरे ये नन्हें मुन्ने लाड़ले बच्चे।ख़ैर लड्डूओ के वितरण के साथ ही इस साल का गणतंत्र दिवस का समापन हुआ और माड़साहब लोग उसी भामाशाह के घर दावत पर चले गये।
जय हिंद.... Mr. Om Prakash Bishnoi
~फ़ेक न्यूज़~
साँचोर: रोज दस बजे स्कुल जाने वाला वो ही माड़सा आज अपनी धर्मपत्नी से सुबह पाँच बजे ये कहते हुये सुना गया की “ए संजये गी माँ! फटाफट पाणी ऊनो कर,आज छेब्बीस जेनभरी है,स्कुल जानो है” कान से थोड़ी बहरी श्रीमतीजी ने तपाक से पूछा “किंगी जानछड़ी है?” मास्टर ग़ुस्से में बोला “अरे जान तो मेरी छड़ी ही न्याल हुयो वहु तो,आज झंडो है झंडो” माड़सा ने नहाधोकर आठ गुना बने अमल की एक काकरी मुँह में दबाते हुये बोला की “जे मोक्को मिल्यो अर लाडु ऊबरया तो लीआव हूँ हो”
शोरूम से लेकर आज तक रिज़र्व मोड पेट्रोल में रहने वाली बजाज प्लेटिना 100CC बाइक को किक मारते हुये गुरुजी चल दिये गणतन्त्र दिवस उत्सव मनाने।स्कुल की छत पर लगे माइक में बज रहे गाने “ज़रा आँख में भरलो पानी” को सुनकर माड़सा की आँखो में हक़ीक़त में पाणी बह रहा था क्यूँकि आज अफ़ीम उगा नही पाये थे,ख़ैर ये सोचकर अपने लक्ष्य की और बढ़ रहे थे की कोई तो स्कुल में मनवार करेगा ही।
उधर गाँव वाले अपने अपने बच्चों के हाथ पकड़े स्कुल में ऐसे दाख़िल हो रहे थे जैसे 69सालों से ग़ुलामी सह रहे इन काले अंग्रेजो के सिस्टम से आज मुक्त होकर ही घर जायेंगे।इधर सरकारी स्कुल के मास्टर अपने अपने काम में मगन थे कोई लड्डू बाँटने के लिये भामाशाह को पटा रहा था तो कोई बच्चों को भाषण कैसे देना है वो सीखा रहा था,सुदूर मैदान में खड़ा शारीरिक शिक्षक मैदान में शुरू होने वाले पोलो खेल में घोड़ों की नाल पकड़े उस घुड़सवार की तरह लग रहा था जो किसी तरह ये चाहता था की पीटी परेड ठीक ढंग से हो जाये।हेड मास्टर साहब अपने भाषण में अंत समय में एसी कीले ठोक रहे थे ताकि गाँव वाले प्रभावित हो और किसी आला अधिकारी को शिकायत ना करे।
लड्डू कितने मंगवाने है इसलिये बच्चों की गिनती कर रहा गणित का जबलपुर से B.ed किया मास्टर बार बार गिनती भूले जा रहा था क्यूँकि आज स्कुल में ना पढ़ने वाले बच्चे भी लड्डू के लालच में आ गये थे।
गाँव के बस स्टेशन और चौहटे वाली किराने की दुकान पर रोज़ MLA/MP लेवल की राजनीति पर किचला/बहस/तर्क वितर्क करने वाले माड़ साहब आज माइक संचालन कर रहे थे और ज़ोर ज़ोर से बीच बीच में भारत माता की जय भी बोल रहे थे,जोश में एक बार तो भूल से भारत माता के साथ प्रगतिशील शिक्षक संघठन की भी जय बोल गये।ख़ैर आख़िरकार 69वाँ गणतंत्र दिवस जनगणमन गीत से शुरू हुआ और सबने अपनी अपनी औक़ातानुसार व पहुँच के हिसाब से कुर्सियाँ हथिया ली जैसे कांग्रेस राज में रॉबर्ट वाड्रा ने किसानो की ज़मीन। साँसकर्तिक कार्यक्रम चल ही रहा था की तभी रेत पर बेठे बच्चों में से एक आवाज़ आइ की “माड़सा ओ दिनियो मेर लार ऊ हवा भरे है” दिनिये नाम का बच्चा पूरी स्कुल में उद्दंड और बदमाश था और उसको पता था की आज उसको कोई कुछ नही कहेगा क्यूँकि पूरे गाँव वाले आये हुये है, रोज गुरुजी के चाय बनाने के लिये “इंधन” “कूचरा” ना लाने पर बेंतो से पिटाई करने वाले शारीरिक शिक्षक भी आज बड़े प्यार से बोले की “दिनेश बेटा बदमाशी नहीप”।
उधर वो सुबह जल्दी जगे गुरुजी के अफ़ीम ना उगने पर नाक में से पानी,छींके और आँखो में से घड़ीयाल की तरह आँसु बाहर आ रहे थे,किसी तरह उन्होंने आज के लाभार्थी भामाशाह के हार्डकोर बँधानी ताऊ के पास आकर पूछा की “ख़ियाणीया गो तो नाव कर लियो भाई अण थारे हड़मान,पैसा तो कई लोग कमाते है मगर दान और पुण्य करना हर किसी के वश की बात नही”
“खियानी सल्तनत/ठिकाने/वंश का नाम सुनते ही उस भामाशाह के ताऊ ने फ़टाक से अपनी जेब से सो ग्राम अफ़ीम वाली पोटली निकाली बाहर और गुरुजी को कर दिया घंटाघर की घड़ी की तरह।
एक तरफ़ गणतंत्र उत्सव चल रहा था तो दूसरी तरफ़ अद्र्श्य भारत माता अपनी छाती के ऊपर बेठे नन्हें नेनिहालों को देखकर अपनी आँखो में से टप टप आँसु टपका रही थी ये सोचकर की क्या होगा इनके भविष्य का,बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कैसे आगे बढ़ पायेंगे सरकारी स्कुल के मेरे ये नन्हें मुन्ने लाड़ले बच्चे।ख़ैर लड्डूओ के वितरण के साथ ही इस साल का गणतंत्र दिवस का समापन हुआ और माड़साहब लोग उसी भामाशाह के घर दावत पर चले गये।
जय हिंद.... Mr. Om Prakash Bishnoi
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