आपको क्या लगता है देश पर संकट के लिए कौन दोषी है? भाजपा, कांग्रेस, आरऐसऐस अथवा क्षेत्रीय दल? बिलकुल नहींI दोषी है कट्टरपन जिसने विवेक को हर कर भारतीयों को भेड़ बना दिया है जिसको कोई भी हाँक ले जाता हैI ये विवेकहीन लोग गलत सरकारें चुनते हैं भेड़ों की तरह और फिर रक्त के आंसू रोते हैंI ये लोग जनसँख्या बढ़ाते हैं लेकिन आने वाली पीढ़ियों का कैसे शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास किया जाए, नहीं जानतेI दोषी हैं: (१) कट्टर हिन्दू (२) कट्टर मुसलमान (३) जातिवादी जिसमें कट्टर स्वर्ण और अब कट्टर दलित* भी सम्मिलित हैंI *हकों की लड़ाई में दिक्कत नहीं है, बहुतों की केवल विरोधाभास वाली मानसिकता, अनुचित शब्दों के चयन (मान सकता हूँ कि प्रत्युत्तर-वश हो) और अकर्मण्यता (ग्रांटेड मान कर चलना) में हैI स्पष्ट करते हुए बढूंगा कि योग्यता और ज्ञान किसी धर्म-जाति की जागीर नहीं हैI अब आगे कहूंगा कि इन सभी लोगों में फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) और एडजस्टमेंट (समायोजन) का एलिमेंट (तत्व) है ही नहीं, जोकि अत्यंत आवश्यक हैI ये सभी जड़ समान हैंI ठूंठ हो गए हैंI ये लोग अपने एजेंडे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैंI इन लोगों में राष्ट्रीयता है ही नहींI इन लोगों का समस्त जीवन और ऊर्जा एक-दूसरे को दोष देने, भद्दी अश्लील गालियां बकने, उपहास उड़ाने, एक-दूसरे की अमंगल कामनाओं में व्यतीत हो जाता हैI इन लोगों में विष इस कदर भर चुका है कि किसी एक को समझाओ तो वो पहले तो सुनेगा ही नहीं और यदि सुन भी लिया तो अपने दुश्मन हिन्दू-मुस्लिम अथवा स्वर्ण-दलित पर दोषारोपण शुरू कर देगा, स्वयं में भले ही दूसरे से अधिक दोष होंI इतना प्राचीन और साधन संपन्न देश विकसित नहीं हो पाया और सुना है कि विकासशील भी नहीं रहाI ये लोग राम और रहीम को अपने भीतर उतारते नहीं केवल औज़ार बनाते हैंI अतः ये लोग कायदे से धार्मिक भी नहीं हैंI बुद्ध और अम्बेडकर की गरिमा, ज्ञान, त्याग, तपस्या, व्यक्तित्व को देखते हैं तो पाएंगे कि लोग केवल उनकी चर्चा तक ही हैंI अंत में जोड़ूंगा कि महावीर के जीवन का जैनियों पर प्रभाव भी केवल मांसाहार-निषेध तक ही सीमित हैI यदि किसी ने लेख पढ़ा और असंतुष्ट हुआ तो केवल क्षमा ही मांग सकता हूँI हाँ, हो सकता है कि मैं अपने को व्यक्त करने में जगह-जगह चूक कर गया होऊं, उसके लिए तो क्षमा बनती ही हैI
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