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चिकित्सक vs ज़ाहिल
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आपमें से बहुत कम लोग जानते हैं क़ि पहले साढ़े पांच साल U.G. जिसमे हिन्दी ,अंग्रेजी के साथ संस्कृत भी ओर आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के साथ साथ ही एलोपेथी चिकित्सा की पढ़ाई अथार्थ दो पद्घति की पढ़ाई एक साथ और फिर तीन साल की M.D. या M.S. ट्रेनिंग में खासकर पहले वर्ष में प्रतिदिन औसत 4 घंटे की नींद भी उन युवा चिकित्सकों को नहीं मिल पाती।
कुछ डिपार्टमेंट्स में तो लगातार एक वर्ष वार्ड में रहना होता है।
हाँ न घर , न हॉस्टल।
बहुत डांट पड़ती है अपने सीनियर और प्रोफेसर से हर छोटी सी गलती पर भी।
मरीजों के प्रति व्यवहार और केअर पर बहुत से सेमीनार भी होते हैं।
बीमारी, डिप्रेशन भी कुछ युवा चिकित्सकों को इस दौरान घेर लेता है।
gyne में M.S. करने वाली लड़कियां तो आये दिन रोती मिलेंगी।
23 से 30 वर्ष के ये युवा कमरे में आंसू बहाते मिल जाएंगे।
आयुर्वेद चिकित्सक का अच्छे भविष्य का कोई भरोसा नही होता
एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थाओं में प्रति 2 वर्ष एक सुसाइड आपको सुनने मिल जायेगा
हाँ वही उच्च चिकित्सा संस्थान जहाँ लाखों में एक छात्र के पंहुचने की क्षमता होती है।
कई बार बिना ग्लव्स, बिना मास्क के वे अपनी जान पर् खेल परवाह किये बिना तीमारदारी में लगे रहते हैं।
अनेक M.D. स्टूडेंट स्वाइन फ्लू, TB ,Dengue जैसी बीमारियों के शिकार हो चुके। हर सरकारी मेडिकल कॉलेज में होते हैं।
खाना खाने का वक़्त नहीं होता और कई बार घंटों पानी पीने का तक।
दिन - रात लगातार काम के बाद पढ़ना भी होता है।
और थीसिस भी करनी होती है।
जहां मानवाधिकार एक हफ्ते में 40 घंटे काम की बात कहते हैं
वहीँ ये चिकित्सक कई बार लगातार 90 घंटे की ड्यूटी करते हैं।
कभी कभी 40 घंटे तक सो नहीं पाते।
हर सप्ताह में औसत ड्यूटी के घंटे 100 के ऊपर हो जाते हैं।
छुट्टियां ले पाना भी मुश्किल होता है।
बीमार बच्चे की माँ तक थक कर सो ज़ाती है
लेकिन #रेज़िडेंट_चिकित्सक जगा होता है।
.
मीडिया को , इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मैं एक अच्छा विषय दे रहा हूँ।
आपने अपनी उत्पत्ति से आज तक लापरवाह चिकित्सक , कातिल डॉक्टर , किडनी चोर डॉक्टर, डॉक्टर या हैवान की की हैडिंग के साथ बहुत से कार्यक्रम और ख़बरें दिखाईं और एक कड़वा पब्लिक ओपिनियन बखूबी बना दिया।
ये अलग बात है कि मेरे बहुत से सीनियर और जूनियर पत्रकार मित्र कभी चिकित्सक बनना चाहते थे लेकिन सेलेक्ट नहीं हो पाए थे।
तो ज़रा इनका जीवन करीब से देख कर
खुश हो लीजिये कि सिलेक्शन न होने से आप बच गए।
तो विषय है किसी भी सरकारी अस्पताल में पी.जी. कर रहे चिकित्सकों के 48 घंटों पर एक डॉक्यूमेंट्री बनायें। सच्ची डॉक्यूमेंट्री।
24 घंटे अपने संवाददाता को रेज़िडेंट के साथ रहने दीजिए बस।
आप आर्मी पर बहुत बार यह अच्छा कार्यक्रम कर चुके हैं।
वादा करता हूँ बहुत TRP मिलेगी।
क्योंकि युवा चिकित्सकों का यह जीवन बहुत कम लोग जानते हैं।
पूरा चिकित्सा जगत उद्वेलित है, दुखी है।
वो ब्राइट बच्चा किसी माता - पिता का सपना रहा होगा।
#savedoctors
In recent years crime against doctors have increased not only in this country but all over the globe doctors are facing aggression, threats, abuses, they are loosing time and their lives while saving others.
On 23 March 2018 an incident occurred in DR D Y PATIL MEDICAL COLLGE, PIMPRI PUNE A patient who was a known case of Cardiopulmonary illness died in ICU due to sudden Cardiac Arrest, team of on call doctors tried their best to revive the patient but efforts went in vain.
Later patients relatives had badly beaten up the doctors and used scalpel blades to attack them. They broke hospital property and endangered the life of other icu pts.
The female relatives defamed the doctors gave statement in newspaper that male doctors misbehaved with them on the contrary female doctors, sisters were abused and their lives were in danger. Those doctors got threat calls from local goons and political people.
They threatened to defame us with charges of atrocities, medical negligence and what not.
All the Residents and undergraduates called a strike. The victims and management have given a statement to the police and waiting for action.
We want safe environment for us to work or else one day no doctors will be left because people will stop sending their children in this profession if our own countrymen are the enemies.
Spread the word
#savedoctors
राजनीतिज्ञों की ,कोर्ट की, समाज की खामोशी और भी भयावह है।
मोदी जी !
आपसे अनुरोध है ' मन की बात ' में इस मुद्दे को रखिये।
देश के स्वास्थ्य आंकड़े बेहद शर्मनाक हैं।
यह देश को तय करना है कि
देश को बीमारियों से लड़ना है क़ि चिकित्सकों से।
Dr. Om Prakash Bishnoi
चिकित्सक vs ज़ाहिल
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आपमें से बहुत कम लोग जानते हैं क़ि पहले साढ़े पांच साल U.G. जिसमे हिन्दी ,अंग्रेजी के साथ संस्कृत भी ओर आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के साथ साथ ही एलोपेथी चिकित्सा की पढ़ाई अथार्थ दो पद्घति की पढ़ाई एक साथ और फिर तीन साल की M.D. या M.S. ट्रेनिंग में खासकर पहले वर्ष में प्रतिदिन औसत 4 घंटे की नींद भी उन युवा चिकित्सकों को नहीं मिल पाती।
कुछ डिपार्टमेंट्स में तो लगातार एक वर्ष वार्ड में रहना होता है।
हाँ न घर , न हॉस्टल।
बहुत डांट पड़ती है अपने सीनियर और प्रोफेसर से हर छोटी सी गलती पर भी।
मरीजों के प्रति व्यवहार और केअर पर बहुत से सेमीनार भी होते हैं।
बीमारी, डिप्रेशन भी कुछ युवा चिकित्सकों को इस दौरान घेर लेता है।
gyne में M.S. करने वाली लड़कियां तो आये दिन रोती मिलेंगी।
23 से 30 वर्ष के ये युवा कमरे में आंसू बहाते मिल जाएंगे।
आयुर्वेद चिकित्सक का अच्छे भविष्य का कोई भरोसा नही होता
एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थाओं में प्रति 2 वर्ष एक सुसाइड आपको सुनने मिल जायेगा
हाँ वही उच्च चिकित्सा संस्थान जहाँ लाखों में एक छात्र के पंहुचने की क्षमता होती है।
कई बार बिना ग्लव्स, बिना मास्क के वे अपनी जान पर् खेल परवाह किये बिना तीमारदारी में लगे रहते हैं।
अनेक M.D. स्टूडेंट स्वाइन फ्लू, TB ,Dengue जैसी बीमारियों के शिकार हो चुके। हर सरकारी मेडिकल कॉलेज में होते हैं।
खाना खाने का वक़्त नहीं होता और कई बार घंटों पानी पीने का तक।
दिन - रात लगातार काम के बाद पढ़ना भी होता है।
और थीसिस भी करनी होती है।
जहां मानवाधिकार एक हफ्ते में 40 घंटे काम की बात कहते हैं
वहीँ ये चिकित्सक कई बार लगातार 90 घंटे की ड्यूटी करते हैं।
कभी कभी 40 घंटे तक सो नहीं पाते।
हर सप्ताह में औसत ड्यूटी के घंटे 100 के ऊपर हो जाते हैं।
छुट्टियां ले पाना भी मुश्किल होता है।
बीमार बच्चे की माँ तक थक कर सो ज़ाती है
लेकिन #रेज़िडेंट_चिकित्सक जगा होता है।
.
मीडिया को , इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मैं एक अच्छा विषय दे रहा हूँ।
आपने अपनी उत्पत्ति से आज तक लापरवाह चिकित्सक , कातिल डॉक्टर , किडनी चोर डॉक्टर, डॉक्टर या हैवान की की हैडिंग के साथ बहुत से कार्यक्रम और ख़बरें दिखाईं और एक कड़वा पब्लिक ओपिनियन बखूबी बना दिया।
ये अलग बात है कि मेरे बहुत से सीनियर और जूनियर पत्रकार मित्र कभी चिकित्सक बनना चाहते थे लेकिन सेलेक्ट नहीं हो पाए थे।
तो ज़रा इनका जीवन करीब से देख कर
खुश हो लीजिये कि सिलेक्शन न होने से आप बच गए।
तो विषय है किसी भी सरकारी अस्पताल में पी.जी. कर रहे चिकित्सकों के 48 घंटों पर एक डॉक्यूमेंट्री बनायें। सच्ची डॉक्यूमेंट्री।
24 घंटे अपने संवाददाता को रेज़िडेंट के साथ रहने दीजिए बस।
आप आर्मी पर बहुत बार यह अच्छा कार्यक्रम कर चुके हैं।
वादा करता हूँ बहुत TRP मिलेगी।
क्योंकि युवा चिकित्सकों का यह जीवन बहुत कम लोग जानते हैं।
पूरा चिकित्सा जगत उद्वेलित है, दुखी है।
वो ब्राइट बच्चा किसी माता - पिता का सपना रहा होगा।
#savedoctors
In recent years crime against doctors have increased not only in this country but all over the globe doctors are facing aggression, threats, abuses, they are loosing time and their lives while saving others.
On 23 March 2018 an incident occurred in DR D Y PATIL MEDICAL COLLGE, PIMPRI PUNE A patient who was a known case of Cardiopulmonary illness died in ICU due to sudden Cardiac Arrest, team of on call doctors tried their best to revive the patient but efforts went in vain.
Later patients relatives had badly beaten up the doctors and used scalpel blades to attack them. They broke hospital property and endangered the life of other icu pts.
The female relatives defamed the doctors gave statement in newspaper that male doctors misbehaved with them on the contrary female doctors, sisters were abused and their lives were in danger. Those doctors got threat calls from local goons and political people.
They threatened to defame us with charges of atrocities, medical negligence and what not.
All the Residents and undergraduates called a strike. The victims and management have given a statement to the police and waiting for action.
We want safe environment for us to work or else one day no doctors will be left because people will stop sending their children in this profession if our own countrymen are the enemies.
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#savedoctors
राजनीतिज्ञों की ,कोर्ट की, समाज की खामोशी और भी भयावह है।
मोदी जी !
आपसे अनुरोध है ' मन की बात ' में इस मुद्दे को रखिये।
देश के स्वास्थ्य आंकड़े बेहद शर्मनाक हैं।
यह देश को तय करना है कि
देश को बीमारियों से लड़ना है क़ि चिकित्सकों से।
Dr. Om Prakash Bishnoi
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