एक सरकारी कर्मचारी की मांग

*सेवा में,*
          *श्री नरेन्द्र मोदी जी*
         *माननीय प्रधानमंत्री*
          *(भारत सरकार)*
*महोदय,*
         ```हालांकि यह शिकायत आप सबसे ही है पर शिकायत करें तो किससे करें?  पता नही किस आधार पर हम सारे कर्मचारियों की 2004 से पेंशन खत्म कर दी। आपको यह तो पता ही होगा कि शुरू में सांसदों और विधायकों को केवल भत्ते मिलते थे, बाद में आप लोगों ने संविधान संशोधन द्वारा खुद की पेंशन भी जारी कर ली। आप सबने समाजसेवा के नाम पर राजनीति में प्रवेश किया था कि जन, समाज, क्षेत्र और देश का विकास करेंगे जबकि सफल होने पर खुद के लिए तनख्वाह, भत्ते, पेंशन आदि सारी सुविधाएं जुटा ली... अधिकार का ऐसा दुरुपयोग कोई आप लोगों से सीखे। क्या आप बता सकते हैं कि आप जैसे ही अन्य समाजसेवी गाँव के प्रधानों, बीडीसी मेम्बरों, जिला पंचायतों, व्लॉक प्रमुखों आदि को पेंशन क्यों नही मिलती? आप यह भी सोचिए कि राज्य के राज्यपाल को पेंशन नहीं मिलती, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों के साथी को मुफ्त यात्रा का लाभ नहीं मिलता।
        सरकारी अधिकारियों को दी जाने वाली पेंशन कर्मचारियों और सरकार के योगदान से बने फंड से दी जाती है। अर्थात जो हम देते हैं उसी में सरकार के योगदान को मिलाकर पाते हैं। जबकि आप सभी पूर्व विधायकों और पूर्व सांसदों को उस संचित निधि से पेंशन दी जाती है जिसमें आप सबका कोई योगदान भी नहीं हैं। आप सबको मिलने वाली पेंशन हम करदाताओं का पैसा है। हमारी समझ से आप जैसे समाजसेवियों के लिए पद साघ्य नहीं जनता की सेवा का साधन मात्र है। खुद पर गौर करें...आप को प्रतिमाह लगभग 1 लाख 25 हज़ार रुपये वेतन के रूप में मिलते हैं। साथ ही आपको मुफ़्त आवास, यात्रा, चिकित्सा, टेलीफ़ोन आदि अन्य बहुत सी सुविधाएँ मुहैया करायी जाती हैं। भत्ते के रूप में आपको निर्वाचन क्षेत्र, आकस्मिक ख़र्च, अन्य ख़र्चे एवं डी.ए. आदि दिया जाता है। ठीक ऐसे ही मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को भी मनमाने ढंग से बहुत सारी सुविधाएं दी गयी हैं। आप सबने एक दिन के लिए भी बने सांसदों व विधायकों को 20000 लगभग प्रतिमाह पेंशन तय कर लिया है। (जबकि आपको भी पता है कि उन्हें किसी तरह की पेंशन की जरूरत नहीं होती।(ऐसे सभी लोग अरबपति होते हैं जो सैकडों लोगों को नौकर रख सकते हैं।) जबकि सरकारी कर्मचारियों को लंबी सेवा के बावजूद पुरानी पेंशन को समाप्त कर, अंशदायी पेंशन की अनिवार्य व्यवस्था की गई है जिसमें अब तक परिणाम जो सामने आए हैं किसी को 900 रु महीने किसी को 1000 रु परिवार चलाने के लिए नई पेंशन दी जा रही है।हमारी कटौतियाँ पता नहीं किस कम्पनियों को जा रहा है। यह विदित नहीं है और यह भी अंदेशा नही बल्कि विश्वास है कि NPS भविष्य की सबसे बड़ी घोटाला साबित होने जा रही है। ऐसा क्यों है कि आपकी पेंशन संचित निधि से दी जाए और हमारी पेंशन कम्पनी या बाजार तय करे? क्या यह व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 के विपरीत नहीं है?
         आप और आपकी पार्टी वर्तमान में एक देश -एक टैक्स का बखान करते नहीं थक रही है और इस एक टैक्स से राष्ट्रवाद को बढावा मिलेगा आदि। तो माननीय प्रधानमंत्री जी यदि एक देश-एक टैक्स से राष्ट्रवाद बढता है तो एक देश-एक पेंशन(पुरानी पेंशन) से राष्ट्रवाद कम हो जाता है क्या? यदि देश के लाखों कर्मचारियों को वेतन, पेंशन, भत्ता आदि देने से भारत सरकार की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है तो क्या तमाम वर्तमान व पूर्व  सांसदों, विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों को वेतन, पेंशन, बंगला, गाडी, मुफ्त टेलीफोन, मुफ्त हवाई व रेल यात्रा, सस्ती कैण्टीन आदि में अरबों रुपये खर्च करने से भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है? भारत के लाखों कर्मचारी व आम जनता आपका विचार इस मुद्दे पर जानना चाहती है कि क्या केवल लाल ,नीली बत्ती हटा देने से सरकार के खर्चे में कटौती हो जायेगी? वर्तमान में जब सभी टेलीकाम कम्पनियां 349 रु. में एक महीने मुफ्त काल व नेट की सुविधा दे रहीं हैं तो भारत सरकार अपने सांसदो को 15000/- टेलीफोन भत्ता किसलिए दे रही है? क्या देश की जनता मूर्ख है?
        आप सबने सुनियोजित ढंग से शिक्षक, कर्मचारी पर आरोप लगाया कि वे कामचोर हैं, भ्रष्ट हैं। इसलिए पहले पेंशन बंद कर दी, समुचित वेतन नहीं बढ़ाया, अब वेतन आयोग को बंद कर रहे, अपने पूंजीपति भाइयों को खुश करने के लिए संस्थाओं का निजीकरण करने का मुद्दा उठा रहे। आम जन को आपकी कार्यशैली पसंद आ रही पर भेड़ जनता को हकीकत तब पता चलेगी जब हाथ में कुछ भी नही रह जायेगा।आप जैसे कुछ लोगों का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र का आकार स्वतः भ्रष्टाचार में परिणत होता है। तो कैसे तमाम नॉर्डिक देशों में बड़े सार्वजनिक क्षेत्र हैं लेकिन भ्रष्टाचार कम है। यह देखने में आ रहा कि जैसी सरकार वैसा काम। एक बात और केवल हमें ही क्यों आप सब अपने को क्यों नही देखते? क्या आप सबसे हम ज्यादे अकर्मण्य है? क्या आप सबसे ज्यादे भ्रष्टाचारी हैं? हमारे ऊपर कोई जाँच आती है तो सेलरी रोक दी जाती है आपके ऊपर जाँच ही नहीं आती, आती भी है तो कोई आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ता। मतलब अधिकार सुख इतना मादक होता है कि सामान्य समझ भी नहीं रह जाती?
        यदि 50 वर्ष पार कर चुके कर्मचारी की स्क्रीनिंग करके नौकरी से हटाया जा सकता है यदि ऐसा होगा  तो 50 की उम्र पार कर चुके नेताओं के स्क्रीनिंग की व्यवस्था क्यों नहीं है? ये कर्मचारी तो केवल एक विभाग या कार्यालय चलाते हैं यदि उसके कार्यक्षमता का इतना प्रभाव पड सकता है तो हमारे देश के नेता तो पूरा देश चला रहे हैं क्या 50 की उम्र पार कर चुके नेताओं के कार्यक्षमता का प्रभाव देश पर नहीं पडता होगा? 
         सुना है आप अपने 56 इंच का सीने से मन की बात करते हैं यदि वास्तव में ऐसा है तो हमारे उपरोक्त प्रश्नों का उत्तर आप अगले मन की बात में देश की जनता को बताने की कृपा करेगें।```
                                *प्रार्थी*
                 *समस्त कर्मचारीगण*

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